मिडिल क्लास वर्ग की हालत इस वक़्त चक्की में पिसते घुण जैसी हो चुकी है| जैसे चक्की के दो पत्थरों के बीच घुण पिस्ता है, ऐसे ही मिडिल क्लास उच्च वर्ग और निम्न वर्ग श्रेणी जैसे दो पत्थरों के बीच पिस रहा है|मिडिल क्लास वर्ग की समस्याओं पर सरकार का कभी ध्यान नहीं जाता है|
यदि हम उच्च वर्ग की बात करें तो, यह वर्ग खुद में इतना आर्थिक तौर पर संपन्न है कि इस वर्ग को किसी भी घरेलु आर्थिक संकटों का सामना नहीं करना पढ़ता| दूसरी और निम्न वर्ग की बात करें तो सरकार ने इस वर्ग को इतनी सुविधाएं प्रदान की हुई हैं कि यह वर्ग घर में बैठ कर भी जिंदगी निर्वाह कर सकता हैं|यदि हम पंजाब की ही बात करें तो यहाँ निम्न वर्ग को महीने की 200 यूनिट बिजली, आटा-दाल, शगुन स्कीम, आवास योजना में घर बनाने के लिए पैसे, मुफ्त में स्वास्थ्य बीमा योजना(आयुष्मान भारत योजना) और भी ऐसी कई अन्य मुफ्त योजनाएं दी जाती हैं, वहीं मिडिल क्लास को यह सब खर्च अपनी जेब से करना पढ़ रहा है| निम्न वर्ग की बिजली माफ़ करके उसका बोझ मिडिल क्लास के ऊपर डाल कर उनका बिजली का यूनिट रेट 8 रु. से भी अधिक कर दिया है|अब सवाल यह पैदा होता है कि यह सभी मुफ्त सुविधाओं के लिए सरकार पैसा कहा से ला रही है? यदि कहा जाए कि मिडिल क्लास की जेब से आ रहा है, तो यह कथन गलत नहीं होगा|देश के कोष में सबसे ज्यादा राजस्व का योगदान मिडिल क्लास का होता है और हमारे नेता लोग इसी कोष का वोट बैंक के लिए गलत इस्तेमाल कर रहें हैं|
पंजाब में मिडिल क्लास में आने वाले छोटे दुकानदार, छोटे व्यापारी और प्राइवेट नौकरी करने वाली मिडिल क्लास श्रेणी के लिए सरकार की तरफ से कोई भी ऐसी सुविधा नहीं दी जा रही, जिससे वह आपने आप को सुरक्षित महसूस करें| आयुष्मान भारत योजना जैसी स्वास्थ्य स्कीम से भी मिडिल क्लास को वंचित रखा गया है |
बहुत शर्म की बात है कि हमारे देश की समस्याओं का निवारण करने वाले विधायक, सांसद खुद सरकारी कोष से 4-4, 5-5 पेंशन ले रहें हैं और देश का आर्थिक स्तंभ माना जाता मिडिल क्लास वर्ग ख़ुश को असुरक्षित महसूस कर रहा है|(बरजिंदर सिंह सैनी)

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